जरा सुनो तो

जरा रुको , मेरी बात तो सुनो।  आज की सुबह कितनी सुहानी है।  जरा अंगड़ाई तो लो।  चलो, बालकनी में चलते हैं, देखते हैं अपनी गली की हालत।  साफ सफाई तो है न।  उस कुतिया को देखो गर्भवती है वो, एक बासी रोटी तो दो।  
चलो घूम के आते हैं गुनगुनाती ठण्ड में सुगबुगाहट ला दे वो कोई गीत तो गुनगुनाओ।  कही किसी पथिक को चोट न लग जाये इस पत्थर से , इसे लात से मार के तो हटाओ। आओ तोड़े कनैल,अड़हुल के फूल माँ की पूजा के लिए उन्हें अपने होने का अहसास तो दिलाओ। चलो आये हैं तो देवी मंदिर का दर्शन कर लें तनिक घंटी  तो बजाओ।  नजरें क्यों चुराते हो आते जाते परिचितों को देखकर जरा हौसला करके मुस्कुराओ तो।  चलो चले वापिस।  

आओ छत पर चलें।  फूल मुरझा रहे होंगे रिश्तों की तरह जरा याद तो कर लो।  उन्हें पानी पिलाया जाये कहीं देर न हो जाये।  गुलदाउदी और गेंदे का मौसम है।  गुलदाउदी में सैंकड़ो कलियां लगी हैं जरा देखो तो।  इक्के दुक्के गेंदे भी फूल रहे हैं।  तुलसी  में मंजरियां लगी हैं।  ये क्या, ये सदाबहार तो सुख रहा है।  आंवले का एक छोटा सा पेड़ माँ ने बाल्टी में लगाया हैं।  एक छोटा सा केला भी है और गमले में लगे इस पीपल को देखकर हंसी आती है क्योंकि इसमें सिर्फ चार ही पत्तियां हैं। चलो देखें ,माँ ने नयी क्यारी लगाई  रातरानी की। चलो कुछ समय इसके बीच गुजारें। 








सर्दियां आ गयी हैं, त्वचा कांतिहीन हो गयी है चलो आज घृतकुमारी (एलोवेरा ) से मसाज कर लो चेहरे पर, कुहनियों पर और नाखुनो पर।  थोड़ा सवांर लो खुद को।  क्यों खोये खोये रहते हो ? इतनी गहरी चुप्पी ठीक नहीं।  कभी ठठा कर हंस भी लो।  


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