५० साल बाद

कभी कभी मैं सोंचता हूँ आज के ५० साल बाद क्या होगा? जब हमारा कोई गाँव न होगा ! न होंगे कोई अपने ! न होंगी चाची ,,, दादी माँ तो अब रही ही नहीं... न होगा कोई पीपल का पेड़ (अब ही बड़ी मुस्किल से दीखते हैं ), न होगा कोई देवी  माँ का मंदिर किसी नीम के पेड़ के नीचे. और बगल में कोई ताल .. कोई तलैया ,,,, और कोई मेरे गाँव के जैसा टूटा फूटा प्राथमिक विद्यालय ! और ५० साल मेरे मित्र भी तो नहीं होंगे कोई मर चूका होगा तो कोई technoसिक हो जाएगा ! आज ही सब मोबाइल में डूबे रहते हैं बात करने की फुर्सत नहीं है ! मोबाइल में खो गए हैं, शराब में खो गए हैं और खो गए हैं इस जगत की माया में ! कलयुग पल पल रंग दिखा रहा हैं और ये रंगे जा रहे हैं उस रंग में ! और मैं देख रहा हूँ उनका विस्थापन मुझसे ,अपने परिवार से, अपनी जाति  से, अपने धर्म से, और डूब रहे हैं वे कृत्रिम माया में .... सराबोर ,, सानंद। 

 ....... चलो पिछले दिनों को याद करते हैं ..

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