बनारसी कॉमरेड

सामने घाट, वाराणसी के मृत्युंजय महादेव मंदिर के सीढ़ियों पे बैठा हुआ था ! पिछले साल की आई बाढ़ मे सीढ़ियाँ बुरी तरह टूट फुट गयी थी !  मेरे मन में भी टूटे फूटे विचार आ रहे थे ! सामने रामनगर पूल पर तिरंगे की lightening की गयी थी ।उसे ही देख रहा था मैं ।




कल कामरेडों के साथ पहली बार दारू पी और बाबा भी लिया था ! वही कहानी सुनाता हूँ ! अकड़ के खड़ा रहा अंतिम पैग तक पैरों पर । साला, कपार के नस नस में नशा चढ़ गया था। ऐसा लग रहा था कोई घर तक पहुंचा दे। पर वहाँ कोई नही था अपना । कामरेड थे । असली कामरेड । बनारसी कामरेड । साले पी तो इतना रहे थे जैसे गंगा पी जाएंगे । उसमे कुछ बिहारी कामरेड भी थे । जो बिहारी सुशासन को गाली दे देकर पी रहे थे। मैं साला अलग चिंता में था । अपना घर नही क्योंकि बनारस में तो मामा का घर है , क्या सोचेंगे ? पर अभी तो घर पहुंचने की चिंता थी । बाद में मामा को मना भी लेंगे पर अभी अगर नाली वाली में गिरकर लोट गए तो अपने इज्जत की तो लगने वाली थी ना।

तभी मेरे कांधे पर किसी ने  हाथ रखा और उसके बोलने से पहले ही मेरे नथुनो मे गांजे की बदबू भर गयी ! वो कामरेडों का सरदार था ! एकदम पतला एक हड्डी , और उसकी जींस खुल के गिरने ही वाली थी क्योंकि कमर ने अपना दर्प त्याग दिया था ! मेरे कंधे से हाथ हटाना उसकी मजबूरी थी ! अपनी जींस को सहारा देते हुये बोला , चलो मैं तुम्हें छोड़ देता हूँ ! मैं भी क्या करता मजबूरी थी ! रात के 1 बज चुके थे ! मैंने भी मन ही मन कहा , अमां जाने दो यार वामपंथी ही तो है, कोई भी हो , है तो मनु , शतरूपा की संतान  ! आजादी के बाद से तो झेल ही रहे हैं , इतने दिनो झेला तो आध घंटे और झेल लेंगे ! घर भी तो पहुंचना है ! उसने अपने व्यक्तित्व पर बिलकुल ही न सूट करने वाली बुलेट निकाली और हम चल दिये ! रास्ते भर मैं उसके वजन और गाड़ी के संतुलन का तुलनात्मक अध्ययन करता रहा !

बनारस की गलियों में bike चलाना भी कम खतरनाक नही है ! सड़क में इतनी विषमता है की सभी संभल के चलते हैं , कहीं उंच नीच न हो जाये ! तभी हम गुप्ता मिष्टान्न भंडार के गुप्ता जी के घर के आगे से निकले ! रात के करीब दो बजे थे ! गुप्ता जी घर के पास एक पत्थर था जो अक्सर कामरेड bike वालों का रास्ता धीमा कर देता था ! कामरेड की रफ़्तार धीमी हुई , एक भद्दी सी गाली से गली वालों को नवाज कर कामरेड ने संतुलन बनाता हुआ आगे बढ़ने का असफल प्रयास किया ! एक सनातन पत्थर ने bike के अगले पहिये को अपने कंधे पर लेकर बाएं से दायें ढो दिया ! फिर क्या था वामपंथ आगे से फिसल चूका था ! कामरेड की गालियां गली की शांति भंग कर रही थी ! bike फिसली तो मैं सनातनी भी फिसल गया पर पुराने बरगद के पीठाधीश ब्रम्हा बाबा ने बचा लिया ! लडखडा कर bike से कूदा ! कान पकड़ कर बाबा को याद किया और माफ़ी मांगी की "अब ना पीयब ए बाबा " !

विशुद्ध पंडित वामपंथ पे चढ़ेगा तो यही हाल होगा ! ये तो मुझे अंदेशा था ही ! धीरे धीरे मैं कामरेड की ओर बढ़ा !
वामपंथ bike के नीचे से निकलने का भीम प्रयत्न कर रहा था ! पर बिलकुल शांत था ! मुझे देख के राहत मिली ! मैंने दोस्ती का हाथ बढाया और उस पर दया दिखाते हुए भीम bike से बाहर निकाला ! पर सनातन पत्थर ने अपना भरपूर बदला लिया था ! वो लडखडा गया ! धीरे धीरे बगल की boundary के पास जाकर सिस्टम के खिलाफ बहुत सारी उलटी की ! उसे देख कर मेरा भी जी मितलाने लगा ! सिस्टम के खिलाफ बहुत गुस्सा था मेरे अन्दर भी पर सनातनी सहन शक्ति ने मुझे वमन करने से रोक दिया ! सब कुछ अपने अन्दर जब्त करने के बाद मुझे नीलकंठ भगवान शंकर वाली फीलिंग्स आई ! कामरेड को लगी ठोकर से मुझे सनातनी सीख मिल चुकी थी ! 
शराब को प्यार से पी लिया तो उसे पचा भी लूँगा , मैंने गहरी सांस ली और अपने अन्दर के भीम उमड़ते घुमड़ते नीले मेघों को अन्दर ही रहने की नसीहत दी ! 

कामरेड के हौसले टूट चुके थे ! अब तो थोड़ा नर्वस था ! कामरेड के भाई कन्हैया कुमार को फ़ोन लगाया गया पर उसने रिसीव ही नहीं किया ! फिर मैंने सुझाव दिया , जे भईल से भईल ! अब धीरे धीरे चल आगे ! रोड पर से बैठ जाना bike पर ! धीरे धीरे चले ! मेरे मामा का घर आ चूका था ! वामपंथ ने अपना कर्तव्य पूरा कर दिया था मुझे घर छोड़ कर ! पर कामरेड की उर्जा मेरी मंजिल पर आकर ख़तम हो गयी ! bike स्टैंड पर लगाकर गेट के चबूतरे पर लम्बा हो गया वो  ! अब मैं घबराया ! वामपंथ को आश्रय नहीं दे सकता , वामपंथ का चलन ठीक नहीं ! कुछ  कुत्ते घर के आगे जमा होने लगे ! एक दुसरे मोहल्ले का कुत्ता भी आ कर गुर्राने लगा ! भले ही सब कुत्ते पूंछ हिला रहे थे पर कामरेड को खदेड़ने की खुसफुसाहट उनमे शुरू हो गयी थी ! आजादी के समय से ही बनारस की गलियों के कुत्ते कामरेडों का बहिस्कार कर रहें हैं ! इनकी कितनी पीढ़ियों ने पियक्कड़ कामरेडों को अपनी अपनी गली से काट कर भगाया है ! आज उनके मन में मेरे प्रति भी श्रद्धा की कमी दिख रही थी ! 

उनमे से एक बुढा कुता आगे बढ़ा ! पूंछ,  कान, गले सब को यूनिफार्म गति से हिलाता हुआ मेरे पास आकर कूं कूं करने लगा ! जैसे कह रहा हो की " का पंडित जी आप पर भी कलियुग का प्रभाव हो गया!  इ कामरेडवा के साथ काहे घूम रहे हैं " ! मैंने उसके कंधे पर हाथ फेरा ! बोला ए भैरो बाबा , इ बेचारा अच्छा कामरेड है हमरा घरे पंहुचा दिया ! १० से अधिक  कुत्ते जमा हो गये थे ! मैंने bike को थोड़ा साइड में लगाया !  दो मिनट सोंचने के अंदाज़ में खड़ा हो गया ! मदिरा का प्रभाव था कोई निर्णय नहीं ले पा रहा था ! अचानक से मेरे पूर्व जन्म का पुण्य उदय हुआ और नशे की हालत में मैंने ऐसा सनातनी निर्णय लिया की मुझे अभी तक गर्व अनुभव होता है ! 

मैं कामरेड के पास पहुँच कर उसके कान में फुसफुसाया ! " ए कामरेड भाई "
पर कामरेड का शीघ्रपतन हो चूका था ! 
उपाय मुझे मालुम था ! मैं मुस्कुराया , कान के पास जा कर धीरे से जय भीम का उच्चारण किया ! विशुद्ध उच्चारण से उपजी उर्जा ने कामरेड को नींद से जगा दिया ! मैंने उसे उठाया ! उसके कंधे को सहारा देकर मनोकामना महादेव घाट पर ले आया ! मंदिर के चिकने चबूतरे पर उसे सुता दिया ! कुत्ते मंदिर के बाहर तक छोड़ने आये थे ! उसे वहां लिटाने के बाद ऐसी भावना आई जैसे महादेव की गोद में लेटा दिया ! गर्मी के दिन थे अतः बिस्तर की विशेष व्यवस्था की जरूरत नहीं थी ! उसे छोड़कर जाने लगा तो उसने हाथ थाम लिया ! कामरेड सलाम के रूप में धन्यवाद् दिया और बोला की आज मैं इतना आजाद हो गया की घर वाले भी सुधि नही लेते ! कहते हुए उसकी आंखे भर आई ! मैं बोला की अपने bike की चाभी और मोबाइल का ख्याल रखना और सुबह सुबह जल्दी कूच  कर जाना नहीं तो सनातनी लात घूसों से कोई नहीं बचा पायेगा , मंदिर में बड़े बड़े नंदी हैं!  और हाँ सुबह सुबह क्रांति करना हो तो घाट पर नहीं दौड़ कर घर जा कर करना ! 


आज फिर महादेव घाट पर बैठ कर कल के पापों का स्मरण हो आया ! भोले बाबा को बार बार मनाना पड़ा ! फिर हंसी भी आई , 
की काशी में वामपंथ भी भोले बाबा के चरण शरण में है ! 

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