कभी न कभी तो पूर्ण विराम होगा, अर्धविराम का अवसान होगा, गौरव की हिमालय ऊँचाई पर गं…
अब का मैं २४ का होने जा रहा हूँ ! बचपन गुजर गया, किशोर अवस्था भी बीत गयी , जवानी …
तुम आओ मेरे सपनो में सपने तो मेरे अपने हैं ! इन घंटों की बेचैनी की जब आ…
नव वर्ष हमारा आता है ! जब खिल जाती वन की कलियाँ जब रंग जाती हैं घर गलियां ज…
भीषण प्रतियोगिता के इस दौर में जब फुर्सत नहीं, लम्बी सांस लेने की भी तब कोई अगर खुद स…
आज से ३ साल पहले की बात है , मैं अपने मित्र के साथ IIT का रिजल्ट देखने गया था ! जब व…
माँ भारती को समर्पित मेरी कविता आँखों से आंसू की एक बूंद नही गिरने देंगे …
जब भी किसी को हिचकी आती है , हम कहते हैं की कोई तुम्हे याद कर रहा है . दरअसल ये सारी …
कविता बनती है उनींदे अवचेतन मन में , कविता बनती है ज्यों सर…
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सामने घाट, वाराणसी के मृत्युंजय महादेव मंदिर के सीढ़ियों पे बैठा हुआ था ! पिछले साल की…
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