जादू दो तरह के होते हैं ! एक साधारण जादू और दूसरा काला जादू ! सफ़ेद जादू नाम की कोई चीज नहीं होती ! जो जादू आजकल हम टीवी में देखते हैं वो है साधारण जादू ! जिसे हम हाथ की सफाई भी कहते हैं ! इसमें विज्ञान और प्रदर्शन की भूमिका होती है ! इसमें देखने वाले व्यक्ति का ध्यान भटका दिया जाता है ! जादू अगर बाएं साइड से हो रहा है तो व्यक्ति का फोकस दायीं ओर खीचा जाता है ! इससे व्यक्ति इसे चमत्कार समझने लगता है ! इसमें विज्ञान खासकर रसायन से सम्बंधित कलाएं भी की जाती हैं !
दूसरा होता है काला जादू !
काला जादू शब्द का अर्थ है ऐसी क्रिया जिससे किसी का नुकसान हो ! मरण, मोहन , वश , उच्चाटन आदि क्रियाएं इसी के अंतर्गत आती हैं ! सनातन हिन्दू धर्म में इसे तांत्रिक क्रिया भी कहते हैं ! तंत्र विद्या उन शक्तियों को जागृत करता है जो विनाशकारी हैं ! जैसे श्मशान काली ! इस प्रक्रिया में बलि की भी प्रथा है ! क्योंकि हिन्दू समाज में जन्म , मृत्यु को बराबर माना गया है ! तो जीना और मरना एक ही जैसी प्रक्रिया मानी गयी है जैसे एक व्यक्ति वस्त्र बदलता है वैसे ही आत्मा शरीर धारण और त्याग करती है !
तंत्र विद्या के विद्वान लोग मानते हैं की भारत में अभी भी कुछ लोग इन शक्तियों से परिचित हैं और उनकी साधना करते हैं ! ज्यादातर परंपरा प्राप्त सन्यासी ही इनकी साधना कर सकते हैं ! ऐसे लोग अघोरी भी कहे जाते हैं ! नागा साधू भी इनकी साधना करते हैं ! ऐसे लोग स्मशान में रहते हैं और भुत भविष्य सभी की जानकारी रखते हैं ! ऐसे ही एक साधू का विडियो नीचे दिया है मैंने !
क्या काला जादू में अदृश्य शक्ति होती है ?
ऐसा माना जाता है की कुछ आत्माएं जिनकी अकाल मृत्यु होती है वो आत्माएं भटकती रहती हैं ! उनका शरीर नष्ट हो जाता है पर उनकी भूख , प्यास आदि भावनाएं नष्ट नही होती ! साधक उन्हें उनकी मनपसंद चीजें अर्पित करते हैं जिसके आस पास ही ये मंडराकर अपनी भूख प्यास को तृप्त करने का असफल प्रयास करते हैं ! परन्तु इससे साधकों को काफी लाभ होता है ! आत्मा की गति मन की गति होती है ! इससे वो काफी तरह की जानकारी प्राप्त करते हैं ! जैसे किसी का बच्चा खो गया ? या अन्य कई तरह की जानकारियां !
हाँ , एक बात मैं साफ़ कर दूं की ये सिर्फ उच्च कोटि के साधक ही कर सकते हैं ! बहुत सारे लोग सिर्फ दिखावा करते हैं ! आत्मा के विषय में अत्यधिक शोध की आवश्यकता है ! क्यूंकि भारत के लोग इसमें काफी उन्नत रहे हैं ! विश्व परिदृश्य में भी लगभग सभी देश और उनके लोग आत्मा के विषय में जानने को लालयित रहते हैं ! समर्थ लोग इनका पथ प्रदर्शन करें तो भारत का अध्यात्म दुनिया को लाभ दे सकता हैं ! कुछ लोग इसे विज्ञान मानते हैं!
इस्लाम में इन आत्माओं को रूह कहा जाता है और इसाई लोग स्पिरिट कहते हैं ! इस तरह हम देखते हैं की सभी धर्मों में आत्माओं को मानने वाले लोग रहते हैं ! ऐसा क्यों? भले ही आज की नयी पीढ़ी इस सच्चाई से मुह मोड़ ले परन्तु इनमें क्या तनिक भी सच्चाई नहीं ! ऐसा नही है ये विशुद्ध शोध का विषय है जिसे आत्मा के विज्ञान रूप में सभी केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में स्थान मिलना चाहिए !
और कुछ लोग इसे अन्धविश्वास मानते हैं , आप क्या मानते हैं ? हमे कमेंट में बताएं ! धन्यवाद !

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