Afghanistan में खेल कर गया अमेरिका
तो आप कहेंगे कि अफगानिस्तान में तो अमेरिका हार गया बुरी तरह। billions ऑफ डॉलर के हथियार तालिबान के हाथ लगे। हाल ही में काबुल एयरपोर्ट धमाकों में कई लोगों की जान गई जिसमें US मरीन भी शामिल थे।
तो मेरे भाई wait wait
These all the part of a great game.
अब वो ग्रेट गेम है क्या ये तो मैं बताऊंगा ही पर साथ ही ये भी बता दूं कि गेम के राज खुलने लगे हैं। चलो दो घटनायें बताता हूँ जिससे आप कुछ अंदाजा लगा पायें।
◆ पहली घटना 2018 में तालिबान के तत्कालीन चीफ मुल्ला बरादर को अमेरिका ने पाकिस्तान की कैद से छुड़वाया । ऐसे भी कई खुलासे हुए हैं कि तालिबान के साथ अमरीका के रिश्ते कई सालों से हैं और 2018 के बाद तो ये लोग कई बार टेबल पर बैठे।
बोर नही करूँगा यार। जल्दी से दूसरी बात बताता हूँ। क्योंकि पहली बात तो आप सभी जानते ही हैं।
◆ दूसरी और सबसे जरूरी बात कल यानी 29 अगस्त 2021 की UNSC मीटिंग में हुई जिसकी अध्यक्षता भारत कर रहा था उस मीटिंग में एक कमजोर से resolution पास हुआ जिसमें तालिबान के जिक्र तो है पर तालिबान के आतंकी संगठन होने का कोई जिक्र नही है । इसका मतलब जल्द ही विश्व भर में तालिबान की सरकार को मान्यता मिलने लगेगी। दूसरी ओर तहरीक एक तालिबान पाकिस्तान को एक आतंकी संगठन की श्रेणी में रखा गया है।
Great Game
मान लीजिए कि भारत, चीन, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, तजाकिस्तान, ईरान , आदि एशिया नाम के एक मुहल्ले में रहते हैं। वहीं अमेरिका दूसरे जिला में रहता है। अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान के घर मे जबर्दस्ती घुस आया और 20 साल रहा पर जब जाने लगा तो बहुत से हथियार छोड़ कर गया। अफ़ग़ानिस्तान के छोटे भाई तालिबान की नज़र उसके घर पे थी जैसे ही अमेरिका भागा तालिबान ने घर पे कब्जा कर के किले बंदी कर दी। तालिबान को कब्जे के दौरान बहुत से हथियार मिले। अब तालिबान का पड़ोसी चीन तालिबान के अँगने से होकर iran जाना चाहता है CPEC रास्ते से। भारत तालिबान के रास्ते होकर रूस जाना चाहता है । रूस तालिबान के अँगने से होकर अपनी गैस पाइप गुजरना चाहता है जो कि पाकिस्तान होकर सीधे भारत तक जानी है। तालिबान के एक दोस्त तहरीक TTP पाकिस्तान पर कब्जा करना चाहता है। जब अफ़ग़ानिस्तान के कब्जे में घर था तो घर बहुत कमजोर था पर तालिबान के कब्जे में अब ये मजबूत है। तो आपको क्या लगता है
★ अमेरिका ने इतने हथियार यहाँ क्यों छोड़े?
★ क्या तालिबान अब अमेरिका के इशारे पर काम करेगा?
कुछ विस्तार में बताता हूँ
तालिबान एक ऐसा संगठन है जिसे सिर्फ गोलियां चलाना आता है सरकार चलाना नही। अब अमरीकी दबाव में ये लोग कह रहे हैं कि हम औरतों पे अत्याचार नही करेंगे, बच्चों को नही सतायेंगे , एक जिम्मेदार सरकार बनाएंगे। अब ध्यान देना की तालिबान का उद्देश्य क्या है। सीधा सा उत्तर है इस्लाम का राज्य कायम करना। तो क्या ये लोग पश्चिमी देशों के दबाव में आकर सब्जिया परचम लहरा पाएंगे। उत्तर है नही।
फिर क्या होगा ?
दूसरे लोग आएंगे जो ये दावा करेंगे कि हम तालिबान से भी ज्यादा कट्टर हैं और हम इस्लामिक शासन ले आएंगे। इन ताकतों में सबसे बड़ा नाम है इस्लामिक स्टेट का । अगर ऐसा होता है तो अफ़ग़ानिस्तान में गृह युद्ध की भी संभावनाएं हैं।
ऐसी परिस्थिति में फायदा किसको होगा ?
अगर समझ पाएंगे तो कमेंट में जवाब देना नही तो ये ग्रेट game है सभी के समझ में नही आता।

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