नव वर्ष

नव वर्ष हमारा आता है !
जब खिल जाती वन की कलियाँ 
जब रंग जाती हैं घर गलियां 
जब उष्ण-शीत का दोष छोड़ 
मतवाला फाल्गुन बहता है ! 
नव वर्ष हमारा चढ़ता है !



जब प्रेम विरह में चूर युगल 
के नैन गुलाबी होते हैं 
जब संध्या के अंधियारे में 
वो प्रेम मिलन को रोते हैं !
तब मतवाला फाल्गुन उनपर 
यौवन उन्माद चढ़ाता है 
नववर्ष हमारा आता है !

जिसको कहते है हम फाल्गुन 
ये फाल्गुन बड़ा रंगीला है  
बागो में अमराई देता 
यौवन को अंगड़ाई देता 
तुम प्रेम लगन में चूर रहो 
ये फाल्गुन कहता जाता है 
नववर्ष हमारा आता है !



यकीन मानिये आज नववर्ष की इतनी शुभकामनाये मिली की दिल घबरा सा गया ! आप लोगो का प्यार और अपना कर्त्तव्य समझ कर मैंने ये कविता लिख दी ! उद्देश्य ये याद दिलाना है की आज तो ख़ुशी मनाये ही पर उत्साहित रहे अपने नववर्ष के लिए ! हमारा नववर्ष कही अधिक सुन्दर और मनोरम है ! 
आगामी सनातन नव वर्ष के लिए ढेरों शुभकामनायें !



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