असम त्योहारों का राज्य है ! बिहू यहाँ का सबसे मुख्य त्यौहार है ! यहाँ तीन बिहू मनाये जाते हैं ! रोंगाली बिहू , काटी बिहू, भोगाली बिहू ! पर इन तीनो में सबसे रंग रंगीला तो रोंगाली बिहू ही है ! बिहू शब्द बिशु से लिया गया है और असमिया में श को ह बोलते हैं ! "बि" का अर्थ है पूछना , "शु" का अर्थ है शांति और समृद्धि ! कुशल क्षेम पूछना ! वैसे तो यहाँ सभी त्यौहार मनाये जाते है ! जैसे होली , दीवाली , दुर्गा पूजा और विश्वकर्मा पूजा आदि पर बिहू की बात ही अलग है !

काटी बिहू कार्तिक मास में मनाया जाता है ! बिहू का हर त्यौहार कृषि से जुड़ा हुआ है ! आज मैं सिर्फ काटी बिहू पूजा के बारे में अपने अनुभव पर चर्चा करूंगा !
मेरे ऑफिस में सुबह से ही साफ़ सफाई हो रही थी ! कर्मचारियों ने श्रमदान कर सामने तुलसी के चबूतरे को साफ़ सुथरा किया ! मुझे लगा की कुछ खास होने वाला है या कोई ऑफिसर आ रहा है ! दिन भर ऑफिस से बाहर ही रहा क्योंकि मेरा काम अक्सर आउटडोर ही होता है ! शाम को वापस आया तो देखा की पूजा की तयारी हो रही है ! केले के पत्ते, सिंदूर , केले का फल (कदलीफल ), पञ्च मेवा , मुंग की दाल , प्रोखाद के लिए ! यहाँ के लोग स का उच्चारण ख के रूप में करते हैं ! अतः जिसे हम प्रसाद कहते हैं उन्हें ये लोग प्रोखाद कहते हैं !

ऊपर प्रोखाद का चित्र दिया है मैंने
प्रोखाद नमकीन होता है ! प्रोखाद में चना, कटे हुए नारियल , मुंग , केले आदि को चढ़ाया जाता है ! नमकीन प्रसाद का ये मेरा पहला अनुभव था ! अस्तू , शाम को हम सभी तुलसी के चबूतरे के पास बैठे और पूजा प्रारंभ हुई ! हरि ॐ के उच्चारण के साथ भगवन कृष्ण के कई नाम हवा में सुगंध की तरह तैर गए और हम सभी मंत्रमुग्ध रह गये ! यहाँ नाम गुण संकीर्तन का विशेष महत्व है ! यहाँ मंदिर भी हैं और नाम घर भी ! नाम घर जिसे मंदिर की तरह ही स्थान प्राप्त है लोग जाकर भगवन का कीर्तन करते हैं !
तुलसी के चबूतरे को दीपों से सजाया गया ! प्रोखाद समर्पित किया गया ! सब लोग जमीन पर ही प्रणाम की मुद्रा में बैठे ! सब की आँखे मुंदी हुई जैसे लोग कृष्ण के नाम के साथ ही कृष्ण के रुप अमृत का भी पान कर रहे थे ! हम सब ने नाम संकीर्तन किया ! उसके बाद सबलोगों ने प्रेम से प्रसाद खाया ! और हम सभी लोग अपने अपने घर वापस लौट गये !
काटी बिहू , ये त्यौहार इस तरह मनाया गया ! सब लोगों ने मिल कर मनाया और सबसे बड़ी बात की थोड़ी देर के नाम संकीर्तन के पश्चात् ही पूजा ख़त्म हो गयी ! ईश्वर की आराधना का ये सरलतम रूप है ! सभी एक परिवार की तरह इस त्यौहार को मनाते हैं और सभी के बीच प्यार की भावना भी बढती है !
अब रोंगाली बिहू जो सबसे बड़ा और सबसे खास माना जाता है उसे मनाने के पश्चात् उसका वर्णन करूंगा !
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