सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है .. कल्पना करें
एक प्यारी सुबह हो। गुनगुनाती धुप जब आप सर्दी से सिकुड़ रहे हों। हाथ में चाय का प्याला हो। और कानों में हैडफ़ोन।
बस इतना ही नही।
आप शौक़ीन होने चाहिए पुराने गानो के। ताकि स्वरसाम्राज्ञी लता जी से प्रत्यक्ष प्यार के नगमे सुन पाएं। तो लगता है जीवन स्थिर हो गया है। चिड़ियों की आवाज भी आने लगी है और अपनों की याद भी।
मानव सोच कहा पाता है इतनी भीड़ भाड़ में। इतना सुकून किसे। मानव भाग रहा है प्रेम की तलाश में । प्रेम में जीना कहा चाहता है। यहा किसी को कोई मिल भी गया तो विश्वास नही होता। छानबीन करनी पड़ती है। कौन है, कैसा है , मैच करता है की नही मेरे स्टेटस से। उन सब के बाद फिर हम लोग मिलते हैं बातें करते है। आधे रिस्ते तो वही टूट जातें है। साले फील नही करते। इतनी बातें क्यों बे। अगर जीवन जीना है तो फील करो।
फील करो और मुस्कुराओ।फूलों का सुगंध लो। न की उनके काटें गिनो। बात कर कर के पकने और पकाने के बजाय अपने आप को सुनो।
प्रेम प्रेम और प्रेम
प्यार प्यार, ये साला प्यार है क्या।
खाली समय का इन्फेक्शन है ये। जरा सा बेकार क्या हुए प्यार हो गया। अबे साले पसंद करना भी एक चीज है। प्यार का मतलब बेकाबू और पसंद का मतलब , अब इसका क्या मतलब बताऊँ। काबू में है। तुम्हारे सारे जज्बात। और यहाँ खेलने के लिए बड़े बड़े खिलाडी बैठे हैं। कौन , कब और कैसे एक गेम खेल ले तुम्हारे साथ कोई नही जानता।जज्बात पे इनका सर्जिकल स्ट्राइक बड़ा ही खतरनाक होता है। और अपने फीलिंग्स का कचरा अपने timelines पे पोस्ट कर के sympathy गेन भी नही कर सकते। क्या हुआ , कैसे हुआ , अबे साले जो भी हुआ ,, जैसे भी हुआ सब एक फीलिंग्स है। फीलिंग्स कैसे एक्सप्लेन करूँ बे।
आज कल ऐसे लोग नही दीखते जो कहे।
'हाँ यार तेरी फीलिंग्स समझ सकता हूँ। ' सब मजे लेने के लिए तैयार हैं।
आप शौक़ीन होने चाहिए पुराने गानो के। ताकि स्वरसाम्राज्ञी लता जी से प्रत्यक्ष प्यार के नगमे सुन पाएं। तो लगता है जीवन स्थिर हो गया है। चिड़ियों की आवाज भी आने लगी है और अपनों की याद भी।
मानव सोच कहा पाता है इतनी भीड़ भाड़ में। इतना सुकून किसे। मानव भाग रहा है प्रेम की तलाश में । प्रेम में जीना कहा चाहता है। यहा किसी को कोई मिल भी गया तो विश्वास नही होता। छानबीन करनी पड़ती है। कौन है, कैसा है , मैच करता है की नही मेरे स्टेटस से। उन सब के बाद फिर हम लोग मिलते हैं बातें करते है। आधे रिस्ते तो वही टूट जातें है। साले फील नही करते। इतनी बातें क्यों बे। अगर जीवन जीना है तो फील करो।
फील करो और मुस्कुराओ।फूलों का सुगंध लो। न की उनके काटें गिनो। बात कर कर के पकने और पकाने के बजाय अपने आप को सुनो।
प्रेम प्रेम और प्रेम
प्यार प्यार, ये साला प्यार है क्या।
खाली समय का इन्फेक्शन है ये। जरा सा बेकार क्या हुए प्यार हो गया। अबे साले पसंद करना भी एक चीज है। प्यार का मतलब बेकाबू और पसंद का मतलब , अब इसका क्या मतलब बताऊँ। काबू में है। तुम्हारे सारे जज्बात। और यहाँ खेलने के लिए बड़े बड़े खिलाडी बैठे हैं। कौन , कब और कैसे एक गेम खेल ले तुम्हारे साथ कोई नही जानता।जज्बात पे इनका सर्जिकल स्ट्राइक बड़ा ही खतरनाक होता है। और अपने फीलिंग्स का कचरा अपने timelines पे पोस्ट कर के sympathy गेन भी नही कर सकते। क्या हुआ , कैसे हुआ , अबे साले जो भी हुआ ,, जैसे भी हुआ सब एक फीलिंग्स है। फीलिंग्स कैसे एक्सप्लेन करूँ बे।
आज कल ऐसे लोग नही दीखते जो कहे।
'हाँ यार तेरी फीलिंग्स समझ सकता हूँ। ' सब मजे लेने के लिए तैयार हैं।
अब कैसे बताऊँ की लता जी के गानों में इतना जादू है की इतनी फीलिंग्स तो आराम से बाहर निकल ही आई । और कैसा भी मूड हो ऑन हो ही जाता है. पर इस सुबह कोई सवाल कोई जवाब नही। सिर्फ फील करो। ..


0 Comments