हिचकियाँ

जब भी किसी को हिचकी आती है , हम कहते हैं की कोई तुम्हे याद कर रहा है . दरअसल ये सारी बातें प्रेम और अपनापन बढ़ाने के लिए बनायीं गयी है . कभी मुझे भी हिचकी आई थी तब मैं अकेला बैठा था , कोई था नहीं ये बताने को , की वो तुम्हे याद कर रही है . फिर क्या, तन्हाई ने मुझे आगोश में ले लिए .. आखें मूंदे मैं खोने लगा विचारों के द्वंद्व में .. 



हिचकियाँ आती है 
      जब होती है कमी 
      नमी की 
      गले में, और रिश्तों में 
      बेचैनी बढ़ जाती है 
हिचकियाँ आती हैं 

      जब तपने लगती हैं दीवारें 
      स्वाभिमान की 
      दो बूंद तारीफें , वाष्प बन जाती है 
      बेगैरत मुस्कुराते हैं हम, 
      उन्हें देख कर 
      और उनकी हंसी 
      झुलसा देती है जब 
हिचकियाँ आती हैं 
       रुक-रुक कर आती हैं
       यादों की तरह
       दूरी की तरह बढती जाती है
       दर्द के दो घूँट पी लेते हैं, हम
       पर क्या,
हिचकियाँ रूक पाती हैं

       गुजरे बीते शामों की 
       रातें गुमनामों की 
       गुजारी हिचकियाँ लेकर 
       याद दिलाती हैं 
 
       जब जब कोई नयी दस्तक
       होती है दरवाजे पर
हिचकियाँ आती हैं
हिचकियाँ आती हैं

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