कभी न कभी तो पूर्ण विराम होगा,
अर्धविराम का अवसान होगा,
गौरव की हिमालय ऊँचाई पर
गंगाजल का घूँट भर पान होगा।
तू विचारकर ,
तू देख ले,
तू जान ले ,
तू मान ले,
मेरा अंत सत्य का प्रमाण होगा।
योगिनियां नृत्य करती है जहाँ,
जहाँ भोले का निशान होगा,
कल कल बहेगी गंगा बगल में।
मेरी राख और बनारस का श्मशान होगा।
धन्यवाद !


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