फ़ेसबूक पर रामराज्य


हुआ यूँ की आज सबेरे जगकर जब मैं अंगडाई ले रहा था तो कुछ अजीब सा फील हुआ ! पुरे शरीर में मीठा मीठा दर्द था ! मांसपेशिया तनी हुई थी ! बाहें फड़क रही थी ! तकियों को अपनी ओर भींचकर करवटें बदलने लगा ! यकीन मानो मीठा मीठा दर्द जो कम वोल्ट का करेंट पुरे शरीर में बह रहा था , उड़न छू होने लगा ! वैसे तकिये से लिपटना चिपकाना हम कुंवारों के लिए लिए किसी सुन्दरी की गलबहियों के एहसास से कम नहीं! सुबह और शाम हमे कुछ ज्यादा ही तन्हाई फील होती है ! फिर अचानक ही मुझे एक विचार आया और मैंने तकिये को दूर फेंक दिया !




बिस्तर छोड़ , फ्रेश होकर , छत पर टहलने लगा ! चेहरे पे उदासी के बादल छा गए ! चाय आई , पर साली वो भी फीकी थी ! खैर उदासी का कारण ये था की आज मुझे खुद के अन्दर हीन भावना का आभास हुआ ! हुआ यूँ , की जब मैं उनींदी आँखों से तकिये से गुत्थम गुत्था हो रहा था , तो मुझे अपने जोश और पराक्रम का एहसास हुआ ! ज्ञात हुआ की कितना श्रृंगार मेरे अन्दर भरा हैं ! कितने रंगीन सपने , तितलियाँ अभी अभी गुजरीं है मेरे मन मंदिर से ! कितनी रसीली होती है ये सुबह , आँख खुलने से पहले ! आंख खुलने के बाद , सिर्फ मीठा-मीठा दर्द रह जाता है !दिन भर फेसबुक और whatsapp पर नफरत बांटते हम रात में ही चैन पाते हैं ! इस हिस्से का पराक्रम , कभी बागों में, कभी झरनों में नहाते हुए , कभी समुन्दर किनारे चांदनी रात में चाँद के साथ , तो कभी किसी की बाँहों में ! यकीन मानों इतना पराक्रम दिखता हूँ की तुम दंग रह जाओगे ! सुबह जो मीठा-मीठा दर्द होता है , वर्जिस कर के निकाल देता हूँ !
आज ये अचानक फील हुआ की पराक्रम दिखाने के लिए स्वप्न नहीं यथार्थ में जीना होगा ! प्रेम दर्शाने के लिए निराकार को नही साकार को भोग लगाना होगा और मुझ जैसा पराक्रमी इस तकिये पर पराक्रम दिखा रहा है ! इसलिए मैंने तकिये को दूर फेंक दिया! हालाँकि, वह मेरा साथी है , और साकार भी है पर है निर्जीव ! मुझे कोई सुघर आकार की सजीव चाहिए ! जिसकी आँखे छलकती हों , प्रेम , दया , करुणा , ममता से ! मेरी आँखों जैसी नहीं , गुस्सैल, हिंसक और निर्दयी ! चाहो तो प्रोफाइल पिक में देख लो !
सब फेसबुक का किया धरा है ! साले, फेसबुक तुझे तो मैं देख लूँगा ! जिस दिन राम मंदिर निर्माण , common civil code, आ गया , आरक्षण और sc st एक्ट हट गया ,, तेरी गन्दगी मैं ऐसे साफ़ करूंगा की तेरे सारे पराक्रमी दंग रह जायेंगे !  तब तुझे पढ़कर लोगों की आँखों से हिंसा और होठों से गाली नही निकलेगी  , बल्कि आँखों से आमंत्रण और होठो से शरबत पिलाया जायेगा ! इस देश की गंगा स्वच्छ बहे या न बहे पर फेसबुक पर प्रेम की गंगा बहेगी ! सभी एक दुसरे का हाथ थाम कर भावनाओं की गंगा पर नौका विहार करेंगे ! और फेसबुक पर राम राज्य आएगा ये मेरा का वादा है !


नोट: वामपंथी लोग जय श्री राम बोल कर कॉपी करें नहीं तो श्राप लगेगा !
अपने अनुभव कमेंट में साझा करें !

Post a Comment

0 Comments