कोई भी दिन अलग नहीं होता !आज की सुबह भी खास नही थी, आम थी बिलकुल मेरी तरह ! उनींदे…
सुबह सुबह मुर्गा भात खाकर साहब टाइट हो गए। गरम मसाले की गर्मी से खून खौलने लगा । …
ये एक मानसिक द्वंद्व है .. श्री राम जाने। उन्होंने विचित्र मन क्यों बनाया। व…
इसका बोध उसे तब हुआ जब वो पुराने हॉस्टल के उस कोने में उस बिस्तर के पास अकस्मात…
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सामने घाट, वाराणसी के मृत्युंजय महादेव मंदिर के सीढ़ियों पे बैठा हुआ था ! पिछले साल की…
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