जरा रुको , मेरी बात तो सुनो। आज की सुबह कितनी सुहानी है। जरा अंगड़ाई तो लो। चलो, बा…
कभी कभी मैं सोंचता हूँ आज के ५० साल बाद क्या होगा? जब हमारा कोई गाँव न होगा ! न हों…
कविता बनती है उनींदे अवचेतन मन में , कविता बनती है ज्यों सर…
ये एक मानसिक द्वंद्व है .. श्री राम जाने। उन्होंने विचित्र मन क्यों बनाया। व…
इसका बोध उसे तब हुआ जब वो पुराने हॉस्टल के उस कोने में उस बिस्तर के पास अकस्मात…
सासाराम ,सहसराम , या सहस्त्रराम जैसे नाम ऐतिहासिक है वैसा ही शहर भी । शहर पु…
सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है .. कल्पना करें एक प्यारी सुबह हो। गुनगुनाती धुप ज…
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सामने घाट, वाराणसी के मृत्युंजय महादेव मंदिर के सीढ़ियों पे बैठा हुआ था ! पिछले साल की…
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