हुआ यूँ की आज सबेरे जगकर जब मैं अंगडाई ले रहा था तो कुछ अजीब सा फील हुआ ! पुरे शरीर …
सुबह सुबह मुर्गा भात खाकर साहब टाइट हो गए। गरम मसाले की गर्मी से खून खौलने लगा । …
कभी न कभी तो पूर्ण विराम होगा, अर्धविराम का अवसान होगा, गौरव की हिमालय ऊँचाई पर गं…
अब का मैं २४ का होने जा रहा हूँ ! बचपन गुजर गया, किशोर अवस्था भी बीत गयी , जवानी …
गत वर्ष के ३१ दिसम्बर को बक्सर जेल में कोहराम मच गया जब पांच सजायाफ्ता कैदी जेल से फर…
तुम आओ मेरे सपनो में सपने तो मेरे अपने हैं ! इन घंटों की बेचैनी की जब आ…
नव वर्ष हमारा आता है ! जब खिल जाती वन की कलियाँ जब रंग जाती हैं घर गलियां ज…
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सामने घाट, वाराणसी के मृत्युंजय महादेव मंदिर के सीढ़ियों पे बैठा हुआ था ! पिछले साल की…
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